नेपाल सीमा पर पीलर संख्या 131 से 50 मीटर दूर स्थित मोहामारी बस्ती में 11 जुलाई की घटना को लेकर एसएसबी के जवानों और ग्रामीणों में भारी तनाव है। यह हालात 14 जुलाई को स्थानीय सांसद मौलाना असरारुल के दौरे के समय ग्रामीणों के बातचीत में साफ-साफ दिखी। सांसद श्री हक ने ग्रामीणों को बातचीत के दौरान समझाया कि राष्ट्र की रक्षा, सुरक्षा और कानून का अनुपालन करना और कराना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। लगभग एक घंटे की बातचीत में सैकड़ों नागरिकों के बीच में उन्होंने एसएसबी को संदेश देते हुए कहा कि जवानों को कानून की परिधि में रहकर अपने दायित्वों का अनुपालन करना व कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि एसएसबी की गतिविधियों की जांच कराने के लिए वे गृहमंत्री पी। चिदंबरम से सीधे बातचीत करेंगे। इस बाबत उन्होंने ग्रामीणों से एसएसबी के कार्य व्यवहार का लिखित विवरण उपलब्ध कराने निर्देश दिया और ग्रामीणों को चेताया कि राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल अराजक तत्वों के बचाव का कार्य किसी भी परिस्थिति में वे नहीं करेंगे। इससे पहले ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे पूर्व मुखिया नजरुल इस्लाम ने एक- एक करके एसएसबी के जवानों की राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को गिनाया और कहा कि 2001 में एसएसबी की नेपाल सीमा पर तैनाती हुई । एक वर्ष तक हालात ठीक था। उसके बाद एसएसबी ने तस्करी कराना शुरू करा दिया। सबसे ईमानदार एसएसबी अधिकारी भी रात में एक बजे से दो बजे के बीच ट्रक के ट्रक माल की तस्करी करवाते हैं। उन्होंने कहा कि हद तब हो जाती है जब एसएसबी के जवान भारतीय सीमा पर बसे लोगों की पगड़ी से खिलवाड़ करने लगते हैं । पूर्व मुखिया ने कहा कि एसएसबी इज्जत लूटने का प्रयास करती रही है। इसे अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। ऐसा मामला फिर सामने आया तो जवानों का गला नाप दिया जाएगा। उधर जवानों ने बताया कि एसएसबी इंस्पेक्टर सह कंपनी कमांडर सी।एस. जोशी घटना के दिन पीलर संख्या 128, 129, 130 का निरीक्षण करके लौट रहे थे। इसी बीच पीलर संख्या 131 की तरफ से तीन साइकिल सवार, जो खाद लादे थे, साइकिल फेंककर फरार हो गए। श्री जोशी फेंकी गई साइकिल को उठवा कर सड़क पर ला रहे थे कि दर्जनों लोग एकत्र होकर उन्हें व साइकिल को सड़क पर ला रहे जवान को बंधक बना लिया। मारते हुए मोमीना खातून के घर में ले जाकर बंद कर दिया और एक तरफ का दरवाजा तोड़कर घर में घुसने वे छेड़खानी का आरोप लगाते हुए हल्ला मचाया तथा पुलिस को इस बात की सूचना दी। जवानों ने कहा कि नेपाल सीमा की हालात छुटभैया नेताओं के चलते कश्मीर जैसी होती जा रही है और गृह मंत्रालय को बीएसएफ की तरह एसएसबी को भी सीधे गोली चलाने का अधिकार देना चाहिए अन्यथा एसएसबी को नेपाल सीमा पर से हटा देना चाहिए। एक सवाल पर जवानों ने बताया कि जिस कंपनी कमांडर को बंधक बनाकर छेड़खानी करने का आरोप लगाया गया है वे 35 वर्ष तक बीएसएफ में थे और चार वर्ष से बतौर प्रशिक्षक एसएसबी में प्रतिनियुक्ति पर हैं। कुल 39 वर्ष की सेवा में उनके सर्विस बुक में दाग नहीं है। कश्मीर में कमांडों के रूप में अपनी कंपनी की रक्षा करते हुए अकेले ही आतंकवादियों खदेड़ते हुए चार को मार गिराया था। जिस पर उन्हें पुरस्कार व सम्मान पत्र मिला है। गौरतलब है कि सांसद श्री हक और ग्रामीणों के बीच बातचीत के दौरान पूर्व मंत्री जाहिदुर रहमान, प्रमुख दिघलबैंक इम्तियाज आलम, पूर्व पार्षद बबूल इंतखाब, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बिन्दु लाहोटी व प्रखंड अध्यक्ष कांग्रेस पाटी बमभोल झा आदि भी मौजूद थे।
No comments:
Post a Comment