Thursday, July 30, 2009

कृषि केन्द्र: कई ठोकर के बाद कृषि फार्म में मिला मुकाम

रोटी॥?, भूमि से पैदा होती है और भूमि को रोटी पैदा करने लायक मुकाम किसान,मजदूर और कृषि वैज्ञानिक मिलकर देते हैं। किशनगंज में तीन वर्षों तक फूटबाल की तरह ठोकर खाने के बाद कृषि केन्द्र को अपना कार्यालय सह प्रशासनिक भवन, किसान हास्टल तथा थ्रेसिंग फ्लोर स्थापित करने के लिए जगह मिल गई है। यह जानकारी देते हुए एक सवाल पर 29 जुलाई को विषय वस्तु विशेषज्ञ कृषि केन्द्र किशनगंज नन्दिता कुमारी ने बताया कि कृषि वैज्ञानिक और किसान मिलकर मिंट्टी की मौलिक शक्ति को क्षीण किये बिना अन्न पैदा कर सकते हैं।

उन्होंने 27 जुलाई को कृषि वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक के हवाले से जानकारी दी कि कृषि केन्द्र किशनगंज में नारी सशक्तीकरण को ले कई योजनाएं चलाएगी। इस बावत क्षेत्रीय समन्वयक जोन-2 कोलकोटा डा. ए. के. सिंह ने बताया कि ''इनकम जेनेरेसन तथा डृडजरी रिडक्शन प्रशिक्षण '' महिलाएं के लिए आवश्यक है। निदेशक प्रसार शिक्षा डा. मदन सिंह, निदेशक प्रसार सह शिक्षा डा. के.के सिंह, राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय बताया कि किशनगंज की मिंट्टी में ंिजंक की कमी है जिसे ग्रीन मैन्युरिंग लगाकर पूरा किया जा सकता है और मिट्टी की प्राकृति यथावत रहेगी। उन्होंने कार्यक्रम समन्वयक बी.के. मिश्रा के हवाले से जानकारी दी कि कृषि केन्द्र को तीन वर्ष बाद किसान हास्टल, प्रशासनिक भवन आदि के लिए राशि आवंटित कर दिए जाने से किसानों को सुलभता से जानकारी मिलने की बात कहीं।

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