सीमा पर से खुलेआम जारी है प्रतिदिन लाखों रुपये के सुपाड़ी तस्करी का धंधा। सुपाडी माफिया बेखौफ होकर सुपाड़ी तस्करी को अंजाम दे रहे हैं। ठाकुरगंज बस पड़ाव बना है लेन देन कर लाईन पास कराने का अड्डा। जहां खुलेआम वसूला जाता है तस्करों से लाईन देने के नाम पर पैसा। प्रतिदिन किशनगंज एवं इस्लामपुर जाने वाली बसों में सवारी की जगह सुपाड़ी की बोरिया ठूंसी जाती है और जगह नहीं मिलने पर तस्करों बसों के छत पर सुपाड़ी लादने में शर्म नहीं करते हैं।
तस्करों द्वारा सीमा पार नेपाल के भद्रपुर, महेशपुर आदि क्षेत्रों से सीमा पार कर गलगलिया, भक्सरभीट्टा एवं पश्चिम बंगाल के डांगूजोत, कादूमनी जोत आदि क्षेत्रों में पहुंचाया जाता है। वहां से फिर इससे गिरोह के तस्कर सुपाड़ी को इस्लामपुर एवं किशनगंज जाने वाली बसों में लादकर बेखौंफ होकर गनतव्य तक पहुंचाते हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि सीमा पर तैनात एसएसबी एवं कस्टम विभाग की नजर तस्करी के सामानों पर नहीं पड़ती है। हां एसएसबी द्वारा महीने में एक दो बार पांच सात बोरी सुपाड़ी जब्त कर अपने कार्यो की इतिश्री कर दी जाती है। पर सीमा पर तैनात कस्टम विभाग द्वारा तो मानों एसएसबी द्वारा जब्ती सामानों की सीजर लिस्ट बनाना उनकी नियति बन गई है।
गलगलिया से ठाकुरगंज तक रास्ते में गलगलिया, कुर्लीकोर्ट एवं ठाकुरगंज थाना मुख्य मार्ग पर अवस्थित होने के बाद भी इनकी नजर आज तक तस्करी के सामानों पर नहीं है। हालांकि इस संबंध में एसएसबी के अधिकारी ने बताया कि हमारे द्वारा समय समय पर तस्करी के सामानों की जब्ती की जाती है। पर प्रतिदिन तस्करी की सूचना हमें नहीं मिल पाती है। तस्करी के कार्यो में महिलाओं की संलिप्ता होती है यदि समय पर सूचना मिले तो हम महिला जवानों के मदद से नकैल कसने में सफल होंगे।
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