Wednesday, December 16, 2009

जीवन बीमा क्षेत्र में धीरूभाई अम्बानी है ताराचन्द धानुका

आर्थिक विषमता की खाई पाटने का एक मात्र गुरू मंत्र है बचत। बचत के लिए परिवार होना चाहिए छोटा और करना चाहिए 14-15 घंटे तक कार्य । यह मंत्र पूणियां प्रमंडल के दो लाख से अधिक परिवारों को 34 वर्ष के अन्दर एलआईसी अभिकर्ता ताराचन्द धानुका दे चुके हैं। सही मायने में उनका जीवन- संघर्ष और सफलता की दास्तान देश के शीर्ष उद्योगपति मुकेश अम्बानी और अनिल अम्बानी के पिता स्वर्गीय धीरुभाई अम्बानी की तरह है एलआईसी के क्षेत्र में।

अन्तर इतना है कि वे उद्योग के क्षेत्र में उस समय उतरे थे और ये भारतीय जीवन बीमा अभिकर्ता के क्षेत्र में जिसमें इनके पुत्र जगदीश चन्द्र अग्रवाल का स्थान देश के अन्दर वर्ष 2008-09 में तीसरा था। श्री धानुका ने बताया कि वे 1974 तकं किसी तरह से दो समय के भोजन की व्यस्था संघर्ष करके करते थे। उसी समय जीवन बीमा के अभिकर्ता बन गए।

प्रथम जीवन बीमा एक हजार रुपए का किया जिसकी तिमाही किस्त 7।20 रुपए था। उन्होंने कहा कि उस समय बैंकिंग व्यवस्था से लोग परिचित नही थे। एलआईसी की पूरे प्रमंडल एक शाखा,ं जो कटिहार में थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने सबसे बड़ा बीमा एक करोड़ रुपए का किये। इस दौैरान एलआईसी का जोनल कार्यालय मुजफ्फर में था। वे जोनल क्लब के प्रथम सदस्य बने। आज उनकी आय लगभग 20 लाख रुपए है और दस हजार से अधिक परिवार उनके समझाने से आर्थिक बचत कर संतुष्ट जीवन जी रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनका बेटा जगदीस चन्द्र 'भारत के टाप थ्री अभिकर्ता और लगातार छह वर्षो से कार्पोरेट क्लब का' सदस्य है जिसकी आय वर्ष 2008-09 में 1.20 करोड़ थी। दूसरा बेटा गोपाल बिहार विधानसभा में ठाकुरगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक है। इसके अलावा उन्होंने सुरजापुरी विकास मोर्चा का गठन करके अधिकार से वंचित गरीबों के लिए राष्ट्रपिता गांधी जी की नकल करते हुए हजारों लोगों के साथ किशनगंज नगर में गत वर्ष पैदल मार्च करके स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के तेवर को दिखाया ।

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