पौधों को आर्थिक विकास से जोड़ देने पर ग्लोबल वार्मिग को लेकर विश्व में जारी चिंता पर लगाम लग जाएगा। इसका अनुपम उदाहरण किशनगंज है,जहां पर 50 हजार एकड़ भूमि में चाय बागान के साथ हरे-भरे वृक्ष लहरा रहे हैं। किशनगंज जिले के ठाकुरगंज और पोठिया प्रखंड के किसान चाय बागान के साथ वृक्ष लगाने में जिले के अन्दर अव्वल हैं जिसका मुख्य कारण है चाय के पौधों को छाया देने के लिए हरे-भरे पेड़ की जरुरत। गौरतलब है कि पर्यावरण के साथ आर्थिक उपार्जन होने से ही यह क्रांति क्षेत्र में आयी है जिसे बिहार सरकार ने स्वीकार करते हुए चाय प्रोत्साहन नीति 2009 को विचाराधीन बताया है। यह जानकारी देते विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने बताया कि राज्य में चाय की खेती एवं चाय प्रसंस्करण को उद्योग का दर्जा दिए जाने संबंधी प्रोत्साहन नीति पर विचार जारी जिसे लागू करवाने के लिए वे प्रयासरत हैं। गौर तलब है कि चाय बागान के माध्यम से जिले को हराभरा बनाने का सबसे पहला श्रेय जिले में चाय की पत्ती के जनक कहे जाने वाले राजकरण दफ्तरी को जाता है।
Monday, January 25, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment